
सूरत। गुजरात सरकार द्वारा राज्य में यूनिफॉर्म सिविल कोड (UCC) लागू करने की दिशा में उठाए गए कदम को लेकर अब कानूनी विवाद शुरू हो गया है। सरकार ने हाल ही में इसके लिए एक यूसीसी कमेटी का गठन किया है, जिसे लेकर सूरत के व्यापारी और वकील वहाब सोपारीवाला ने गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी है।
इससे पहले भी वहाब सोपारीवाला ने इसी मुद्दे पर हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे न्यायालय ने यह कहते हुए खारिज कर दी थी कि राज्य सरकार ने यह समिति संविधान के अनुच्छेद 162 के तहत अपनी कार्यकारी शक्तियों का उपयोग कर बनाई है, और ऐसे मामलों में अदालत हस्तक्षेप नहीं कर सकती।
हालांकि, सोपारीवाला ने अब सिंगल बेंच के इस आदेश को डिवीजन बेंच में चुनौती दी है। अपनी अपील में उन्होंने दलील दी कि यदि किसी विषय पर कोई कानून मौजूद नहीं हो, तभी राज्य सरकार अपनी एक्जीक्यूटिव पावर का प्रयोग कर सकती है। लेकिन इस मामले में पहले से ही कमिशन ऑफ इन्क्वायरी एक्ट, 1952 लागू है, जिसके अंतर्गत ही किसी समिति का गठन होना चाहिए था।
वहीं, वकील जमीर शेख ने भी सरकार के निर्णय पर सवाल उठाते हुए कहा कि इस समिति में शामिल सभी सदस्य सरकार से जुड़े हुए लोग हैं। इनमें से कोई भी सदस्य ख्रिस्ती, बौद्ध, जैन, सिख या मुस्लिम समुदाय से नहीं है — जबकि यूसीसी जैसे संवेदनशील विषय पर सभी धर्मों के पर्सनल लॉ के जानकारों का शामिल होना आवश्यक है।
इसके अलावा, उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि यूसीसी समिति के गठन को लेकर सरकार ने कोई लिखित आदेश जारी नहीं किया है। आम तौर पर किसी सरकारी निर्णय के लिए लिखित नोटिफिकेशन जारी किया जाता है, लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं किया गया, जिससे पूरे निर्णय पर संदेह की स्थिति उत्पन्न होती है।
अब यह देखना दिलचस्प होगा कि गुजरात हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच राज्य सरकार के इस कदम पर क्या रुख अपनाती है और क्या यूसीसी समिति का गठन बरकरार रहेगा या निरस्त किया जाएगा।




