
सूरत। शहर के एयरपोर्ट के पास नडतरूप (अवरुद्ध) ऊँची इमारतों को लेकर जिला प्रशासन की लापरवाही सामने आई है। मानवाधिकार आयोग ने सूरत कलेक्टर को नोटिस जारी करते हुए 15 अक्टूबर 2025 को उपस्थित रहने के आदेश दिए हैं। यह नोटिस शहर के जागरूक नागरिक एवं सूरत एयरपोर्ट एक्शन कमेटी के अध्यक्ष संजय इज़ावा की शिकायत पर जारी किया गया है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि कलेक्टर ने तीन वर्षों तक बिल्डरों पर कार्रवाई नहीं की और लाखों नागरिकों की जान को खतरे में डाल दिया।
एयरपोर्ट अथॉरिटी द्वारा वर्ष 2018 में किए गए सर्वेक्षण में कुल 50 प्रोजेक्टों में से 41 प्रोजेक्टों को नियम विरुद्ध पाया गया था। इनमें से 14 प्रोजेक्टों ने स्वेच्छा से ऊँचाई कम करने की सहमति दी, जबकि शेष 27 प्रोजेक्टों के विरुद्ध डीजीसीए ने अगस्त 2021 में आदेश पारित कर 60 दिनों में बिल्डिंग की ऊँचाई घटाने को कहा। इनमें से 21 प्रोजेक्टों ने हाईकोर्ट में अपील कर दी, जबकि 6 प्रोजेक्टों के बिल्डरों ने कोई अपील नहीं की।
हाईकोर्ट में अपील करने वाले 21 प्रोजेक्ट:
1. सेलैस्टियल ड्रीम्.2. क्रिस्टल पैलेस3. होराइजन,4. रसिक विला,5. सालासर पैलेस.समर्थ एनक्लेव7. श्रीजी रेजीडेंसी8. श्रृंगार रेजीडेंसी9. ओम आइकॉन10. श्याम पैलेस11. स्टार गैलेक्सी12. गोकुल प्लेटिनम13. ग्रीन फॉर्च्यून14. सेवन हेवन अपार्टमेंट15. एम्पायर रीजेंसी16. अगम ए क्रॉसरोड17. स्वस्तिक विहार अपार्टमेंट18. जॉली रेजीडेंसी19. हैप्पी ग्लोरियस20. द इवोल्यूशन
21. हैप्पी रेजीडेंसी
बिना अपील वाले 6 प्रोजेक्ट:
1. फ्लोरेंस2. जश रेजीडेंसी3. सर्जन अपार्टमेंट4. फियोना अपार्टमेंट5. रावी रत्नम अपार्टमेंट
6. एल एंड टी अपार्टमेंट
आरोप है कि एयरपोर्ट डायरेक्टर और सूरत महानगरपालिका की ओर से लगातार पत्राचार के बावजूद कलेक्टर ने तीन वर्षों तक कोई कार्रवाई नहीं की। यहाँ तक कि 12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए विमान हादसे के बाद भी कार्रवाई टालते हुए जिम्मेदारी एयरपोर्ट अथॉरिटी पर डाल दी गई। शिकायतकर्ता संजय इज़ावा ने तात्कालीन कलेक्टर आयुष ओक और वर्तमान कलेक्टर सौरभ पारधी के विरुद्ध यह मामला मानवाधिकार आयोग में उठाया, जिसके बाद आयोग ने संज्ञान लेकर समन जारी किया है।




