
सूरत। सूरत कमर्शियल कोर्ट ने डिज़ाइन उल्लंघन से जुड़े एक अहम मामले में फैसला सुनाते हुए वादी पक्ष की अंतरिम मनाही आदेश (वचगाळा रोक आदेश) की मांग को नामंजूर कर दी। इस निर्णय से प्रतिवादी पक्ष को बड़ी राहत मिली है।
मामले में वादी ने दावा किया था कि उसकी एक डिज़ाइन विधिवत रूप से रजिस्टर्ड है, जिसकी नकल कर प्रतिवादियों ने लेडीज़ कुर्ती का निर्माण व बिक्री की है। इसलिए कोर्ट से अंतरिम रोक आदेश जारी करने की मांग की गई थी।
प्रतिवादी पक्ष के वकील एडवोकेट जयकिशन भोपाल और एडवोकेट खुश्बू भोपाल ने कोर्ट में दलील दी कि वादी की डिज़ाइन न तो नई है और न ही मौलिक। उक्त डिज़ाइन रजिस्ट्रेशन से पूर्व ही बाजार व ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर उपलब्ध थी। इसके साथ ही उन्होंने डिज़ाइन एक्ट, 2000 की धारा 4 (नई या मौलिक न होने वाली डिज़ाइन को संरक्षण नहीं) और धारा 19 (डिज़ाइन रद्द करने की प्रक्रिया) का हवाला देते हुए पहले से ही कंट्रोलर समक्ष रद्द करने की अर्जी दाखिल कर रखी है।कोर्ट ने तथ्यों का विश्लेषण करते हुए कहा कि वादी अपने पक्ष में प्रथम दृष्टया केस स्थापित करने में विफल रहा है। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि जब वादी प्राथमिक स्तर पर मामला सिद्ध नहीं कर पाता, तो ‘बैलेंस ऑफ कन्वीनियंस’ और ‘अपूर्णीय क्षति’ जैसी दलीलों पर विचार करने की आवश्यकता नहीं होती।
अंततः 12 सितंबर 2025 को कोर्ट ने वादी की अंतरिम मनाही आदेश की याचिका खारिज कर दी। कोर्ट ने यह भी रेखांकित किया कि डिज़ाइन एक्ट, 2000 के तहत केवल नई और मौलिक डिज़ाइन को ही कानूनी सुरक्षा प्राप्त है। पहले से सार्वजनिक या उपलब्ध डिज़ाइन के आधार पर अंतरिम रोकादेश का दावा कानूनन मान्य नहीं हो सकता।




